MNREGA योजना : जाने क्या है मनरेगा योजना, कैसे रजिस्टर करवा सकते हैं अपना नाम

MNREGA Yojana:- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MNREGA) भारत में लागू एक रोजगार Guarantee योजना है, जिसे 7 सितंबर 2005 को विधान ने अधिनियमित किया था. यह योजना प्रत्येक वित्तीय वर्ष में किसी भी ग्रामीण परिवार के उन वयस्क सदस्यों को 100 दिन का रोजगार प्रदान करती है जो प्रतिदिन 220 रुपये की सांविधिक न्यूनतम मजदूरी पर सार्वजनिक कार्य-सम्बंधित अकुशल मजदूरी करने के लिए तैयार हैं. यह योजना 2 फ़रवरी 2006 को 200 जिलों में शुरू की गई, जिसे 2007-2008 में अन्य 130 जिलों में विस्तारित किया गया और 1 अप्रैल 2008 तक अंततः भारत के सभी 593 जिलों में इसे लागू कर दिया गया.  2010-11 वित्तीय वर्ष में इस योजना के लिए केंद्र सरकार का परिव्यय 40,100 करोड़ रुपए था. इस अधिनियम को मुख्यत ग्रामीण लोगों की क्रय शक्ति को बढ़ाने के लिए किया गया था, मुख्य रूप से ग्रामीण भारत में रहने वाले लोगों के लिए अर्ध-कौशलपूर्ण या बिना कौशल काम , चाहे वे गरीबी रेखा से नीचे हों या ना हों उनके लिए यह योजना शुरू की गई है. सरकार की तरफ से एक कॉल सेंटर खोलने की Planing चल रही है, जिसके शुरू होने पर Tax Free नंबर 1800-345-22-44 पर संपर्क किया जा सकता है. शुरू में इसे राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (NREGA) कहा जाता था, लेकिन 2 अक्टूबर 2009 को इसका पुनः नामकरण किया गया और इसे महात्मा गांधी  गारंटी अधिनियम नाम दिया गया.

यह होती है प्रक्रिया

ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्य, ग्राम पंचायत के पास एक फोटो के साथ अपना नाम, उम्र और पता जमा करते हैं जांच के बाद पंचायत, घरों को रजिस्टर करता है और एक Job Card देता है. जॉब कार्ड में, पंजीकृत वयस्क सदस्य का ब्यौरा और उसकी फोटो शामिल होती है. एक पंजीकृत व्यक्ति, या तो पंचायत या कार्यक्रम अधिकारी को लिखित रूप से (निरंतर काम के कम से कम चौदह दिनों के लिए) काम करने के लिए एक आवेदन दे सकता है.  आवेदन दैनिक बेरोजगारी भत्ता आवेदक को भुगतान किया जाएगा. इस अधिनियम के अंतर्गत पुरुषों और महिलाओं के बीच किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता.  इसलिए, पुरुषों और महिलाओं को समान वेतन भुगतान किया जाना चाहिए. सभी वयस्क रोजगार के लिए अप्लाई कर सकते हैं.

दिए जाते हैं यह कार्य

मनरेगा ग्रामीण विकास और रोजगार के दोहरे Target को प्राप्त करता है.  मनरेगा यह उल्लेख करता है कि कार्य को ग्रामीण विकास गतिविधियों के एक विशिष्ट सेट की तरफ उन्मुख होना चाहिए जैसे: जल संरक्षण और संचयन, वनीकरण, ग्रामीण संपर्क-तंत्र, बाढ़ नियंत्रण और सुरक्षा जिसमें  तटबंधों का निर्माण और मरम्मत, आदि होते हैं.  नए टैंक/तालाबों की खुदाई, रिसाव टैंक और छोटे बांधों के निर्माण को भी  जरूरी महत्व दिया जाता है.  लोगों को भूमि समतल, वृक्षारोपण जैसे काम दिए जाते हैं.

आलोचनायें

इस योजना की काफी आलोचना भी की गई है और तर्क दिया गया कि यह योजना भी गरीबी उन्मूलन की अन्य योजनाओं से ज्यादा Effective नहीं है, जहां इसका मुख्य अपवाद राजस्थान है. एक अन्य महत्वपूर्ण आलोचना यह है कि सार्वजनिक कार्य योजनाओं का अंतिम उत्पाद (जैसे जल संरक्षण, भूमि विकास, वनीकरण, सिंचाई प्रणाली का प्रावधान, सड़क निर्माण, या बाढ़ नियंत्रण) असुरक्षित हैं जिन पर समाज के अमीर वर्ग कब्जा डाल सकते हैं.  मध्य प्रदेश में मनरेगा के एक निगरानी अध्ययन में दिखाया गया कि इस योजना के तहत की जा रही गतिविधियां सभी गावों में कमोबेश मानकीकृत हो गई थी, जिसमें स्थानीय परामर्श बिल्कुल ना के बराबर था. आगे की चिंताओं में यह तथ्य शामिल है कि स्थानीय सरकार के भ्रष्टाचार के कारण समाज के कुछ विशेष वर्गों को बाहर रखा जाता है. ऐसा भी पाया गया कि स्थानीय सरकारों ने काम में लगे व्यक्तियों की वास्तविक संख्या से ज्यादा नौकरी कार्डों का दावा किया ताकि आवश्यकता से अधिक फंड मिल सके और स्थानीय अधिकारी उसे गबन कर ले. MNREGA Job Card प्राप्त करने के लिए 50 रुपये तक की रिश्वत दी जाती है.

Deepika Bhardwaj 10 से अधिक वर्षों के अनुभव वाले लेखक और संपादक हैं. उन्हें जॉब पोस्ट लिखने और दूसरों की मदद करने का शौक है. वह एक कुशल लेखक और संपादक हैं, जो पाठक का ध्यान आकर्षित करने के लिए सही शब्द खोजने में माहिर हैं. वह मार्केटिंग और सोशल मीडिया की मजबूत समझ के साथ एक रचनात्मक विचारक भी हैं.

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